ब्लैक फंगस: कैसे करता है हमला, क्या हैं लक्षण और बचने का उपाय…?

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दिल्ली/लखनऊ: कोरोना महामारी के बीच एक और बीमारी ने लोगों को बुरी तरह से डरा दिया है और उसका नाम है ब्लैक फंगस. इस बीमारी को मेडिकल टर्म में म्यूकोरमायकोसिस कहते हैं. यानि, कोरोना के कहर से जूझ रहे देश में अब ब्लैक फंगस की एंट्री ने जान सांसत में डाल दी है. लगातार कहर बनकर टूट रहे कोरोना से लोग उबर भी नहीं पाए हैं कि, ब्लैक फंगस ने लोगों को डरा दिया है. देश मे जहां ऋषिकेश, दिल्ली और महाराष्ट्र में ब्लैक फंगस के मामले सामने आए हैं वहीं उत्तर प्रदेश के मेरठ में ब्लैक फंगस के तमाम केस सामने आए हैं. हालांकि, सूबे के योगी सरकार ने इससे निपटने के तमाम इंतजाम शुरु कर दिए हैं. और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को इस बाबत खास निर्देश भी दिए हैं ।

क्या है ब्लैक फंगस या म्यूकोरमायकोसिस ?

ब्लैक फंगस या म्यूकोरमायकोसिस एक ऐसा फंगल इंफेक्शन है जो कोरोना वायरस की वजह से शरीर में ट्रिगर होता है. इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) की मानें तो ब्लैक फंगस एक दुर्लभ बीमारी है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलती है और यह उन लोगों में ज्यादा देखने को मिल रहा है जो कोरोना वायरस से संक्रमित होने से पहले किसी दूसरी बीमारी से ग्रस्त थे या फिर जिन लोगों की इम्यूनिटी बेहद कमजोर है ।

किन लोगों को बीमारी का ज्यादा खतरा?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने अपने ट्वीट के जरिए बताया कि आखिर किन लोगों को ब्लैक फंगस होने का खतरा ज्यादा है. हर्षवर्धन की मानें तो, जिन लोगों को डायबिटीज की बीमारी है और जिनका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं रहता, जो लोग स्टेरॉयड लेते हैं जिसकी वजह से उनकी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, वैसे लोग जो कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से लंबे समय तक आईसीयू या अस्पताल में भर्ती रहते हैं, वैसे लोग जिनका अंग प्रत्यारोपण हुआ हो या फिर जिन्हें कोई और गंभीर फंगल इंफेक्शन हुआ हो- ऐसे लोगों में ब्लैक फंगस होने का खतरा अधिक होता है।

आंख, कान, नाक और जबड़े पर भी प्रभाव

बता दें कि ब्लैक फंगस कोविड संक्रमण से रिकवर हो चुके मरीजों की न सिर्फ आंखों की रोशनी छीन रहा है, बल्कि यह फंगस त्वचा, नाक और दांतों के साथ ही जबड़े को भी नुकसान पहुंचाता है. नाक के रास्ते यह फेफड़ों और मस्तिष्क में पहुंचकर मरीज की जान ले लेता है. यह इतनी गंभीर बीमारी है कि मरीज को सीधे आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है. लिहाजा समय रहते लक्षणों का पता लगाना बेहद जरूरी है ।

ब्लैक फंगस के लक्षण

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ब्लैक फंगस के लक्षणों पर समय रहते ध्यान दिया जाए तो मरीज की जान बचायी जा सकती है, इसके लक्षणों को देखें तो…

1- आंखों में या आंखों के आसपास लालिपन आना या दर्द महसूस होना

2- बार-बार बुखार आना

3- सिर में तेज दर्द होना

4- खांसी और सांस लेने में तकलीफ महसूस होना

5- खून की उल्टियां आना

6- मानसिक स्थिति में बदलाव महसूस होना

बचाव के लिए क्या करें…

बेहद जरूरी है कि मरीज हाइपरग्लाइसीमिया से बचे यानी अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखे. कोविड-19 से ठीक होने के बाद और अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर आने के बाद भी लगातार ग्लूकोमीटर की मदद से अपने ब्लड ग्लूकोज लेवल को मॉनिटर करना जरूरी है. स्टेरॉयड का बहुत अधिक इस्तेमाल न करें और सही डोज और समय अंतराल का पता होना चाहिए. साथ ही एंटीबायोटिक्स और एंटी फंगल दवा का भी उचित इस्तेमाल करें. ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान ह्यूमीडिफायर के लिए साफ और कीटाणुरहित पानी का इस्तेमाल करें ।

क्या न करें…

बीमारी के संकेत और लक्षणों को नजरअंदाज न करें. नाक बंद होने की समस्या को हर बार साइनस समझने की भूल न करें, खासकर वे लोग जो कोविड-19 के मरीज हैं. अगर जरा सा भी संदेह महसूस हो रहा हो तो पूरी तरह से जांच करवाएं. म्यूकोरमायकोसिस या ब्लैक फंगस के इलाज में देरी की वजह से ही मरीज की जान जाती है. शुरुआत में लक्षणों का पता करके समय पर इलाज होना बेहद जरूरी है ।

 

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