शिक्षामंत्री के भाई को गरीब कोटे से नौकरी, युवा बोले काश ऐसे ‘गरीब’ हम भी होते !

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लखनऊ/सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश में भर्ती और नियुक्तियों का हाल किसी से छिपा नहीं है. स्कूलों में पद खाली है बेरोजगार युवा गुहार लगा-लगाकर थक गए लेकिन भर्ती नहीं हो रही. जो भर्ती हो गई हैं उनमें नियुक्ति पत्र के बाद भी नियुक्ति नहीं मिली है. तमामभर्तियां अदालत में अटकी है,  UPSSSC  जैसे संस्थान का हाल तो पूछिए ही नहीं. लेकिन उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षामंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी की ऐसी लॉटरी लगी है कि, सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चारों तरफ-चर्चा चल  रही रही है, और लोग कह रहे है कि, काश ऐसे गरीब हम भी होते ।

 क्या है मामला ?

दरअसल, बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी की सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी कपिलवस्तु में असिसटेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति हुई है. ये नियुक्ति सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि, मंत्री जी के भाई का चयन EWS यानि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य अभ्यर्थी  (यानि गरीब) कोटे में मनोविज्ञान विभाग में हुआ है.

क्या होता है EWS ?

दरअसल, EWS यानि (Economically Weaker Section) इस कोटे में आने वाले लोगों को सरकारी नौकरी में 10 फीसदी का आरक्षण दिया जाता है.बेसिक शिक्षामंत्रीडॉ सतीश द्विवेदी के पास भी आर्थिक रूप से कमजोर होने का सर्टिफिकेट है. बता दें कि, यदि किसी की सालाना आमदनी 8 लाख रुपये से कम है, तब वह इस श्रेणी का सर्टिफिकेट ले सकता है. सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें वायरल हो रही है जिसमें सवाल उठ रहे हैं कि मंत्री सतीश द्विवेदी ने नियुक्ति में अपनी पावर का इस्तेमाल किया है.  क्योंकि, मंत्री के भाई होने के बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर होने का प्रमाण पत्र भी कई सवाल उठाता है ।

कुलपति साहब को कुछ नहीं पता

इस पूरे मामले में कुलपति और यूनिवर्सिटी प्रशासन पर खूब सवाल उठ रहे हैं. यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ सुरेन्द्र दूबे ने कहा किउन्होंने कहा कि,  यदि EWS सर्टिफिकेट फर्जी होगा तो वे दंड के भागी होंगे, वैसे भी EWS प्रमाणपत्र प्रशासन जारी करता है. मुझे भी नहीं पता था कि वह मंत्री के भाई हैं और मेरे पास इस संबंध में कोई सिफारिश नहीं आई।

मंत्री जी कहिन…

वहीं भाई की नियुक्ति का सवाल जब बेसिक शिक्षामंत्री से पूछा गया तोइसका जवाब देते हुए सतीश द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके भाई का चयन किया है और इस प्रक्रिया में उनका कहीं कोई हस्तक्षेप नहीं रहा है. उन्होंने कहा कि ये दुर्भाग्य है कि वह हमारा भाई है.  भाई की अलग आइडेंटिटी होती है, किसी को आपत्ति है तो जांच करवा सकता है ।

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