बेरोजगारों के महागठबंधन ने सरकार के सामने रखी शर्त ‘आप हमारे साथ तो हम आपके साथ’

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लखनऊ: सालों से उत्पीड़न और शोषण का शिकार सूबे के लाखों लाख संविदाकर्मियों ने लोकसभा चुनाव से पहले अपने हक के लिए कमर कस ली है. अभी कुछ दिन पहले ही बने बेरोजगारों के महागठबंधन के बैनर तले बिना किसी बवाल के अपने जायज सवालों के साथ संविदाकर्मियों ने अब प्रदेश और केंद्र सरकार से साफ कहा है कि, अगर ‘आप हमारे साथ तो हम आपके साथ’ हैं.

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सूबे के सिस्टम रीढ़ हैं संविदाकर्मी
बता दें कि, उत्तर प्रदेश के तमाम विभागों को पिछले कई सालों से लाखों संविदाकर्मी ही चला रहा है. बावजूद इसके सरकारों और सिस्टम ने इनकी ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया है. स्वास्थ्य, शिक्षा से लेकर सूबे के हर विभाग में इन्ही संविदाकर्मियों की कमरतोड़ मेहनत के जरिए काम होता है.

 

मजबरी में लिखीं मांगें


अपनी उपेक्षा से आहत इन संविदाकर्मियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा बताई है. अपनी मांगें पूरी होने के समर्थन में संयुक्त संविदा कर्मचारी/बेरोजगार महागठबंधन ने लिखा है कि, हमने पहले भी आपका साथ दिया है. उदाहरण के तौर पर गृहमंतेरी राजनाथ सिंह के कार्यक्रम में भी प्रतिभाग किया. बीचे चुनाव में सरकार का साथ देने की भी बात कही है.और आगे भी मांगे माने जाने पर समर्थन की बात कही है.

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क्या हैं इनकी मांगे
दरअसल, मौजूदा समय में देश में सातवं वेतन लागू हैं. वहीं केंद्र सरकार के मुताबिक न्यूनतम मजदूरी जहां 24000 और प्रदेश सरकार के मुताबिक 18000 रुपए हैं लेकिन संविदाकर्मियों को 3000 से लेकर 10000 रुपए महीने ही मिलते हैं. ऐसे में इन सभी के सामने अपने परिवार को पालने का संकट मुंहबाहे खड़ा है. प्रदेश और देश में बीजेपी की सरकार होने के कारण इनकी मांगे पूरी होने में ज्यादा परेशानी भी नहीं होगी इसलिए इन्होंने अपनी मांगों में लिखा है कि,
1- बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 31 हजार अनुदेशकों को नियमित किया जाए, इस प्रक्रिया के पूरे होने तक गृह ब्लॉक में स्थानानतरण करते हुए केंद्र द्वारा स्वीकृत मार्च 2017 से 17 हजार रुपए मानदेय का भुगतान किया जाए.

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2-साक्षर मिशन योजना के 1लाख से ज्यादा प्रेरक-समन्वयकों को 20 से 40 महीने के बकाया मानदेय का भुगतान करते हुए सम्मानजनक मानदेय के साथ योजना तत्काल प्रारंभ की जाए.

3-29 सितंबर 2016 को जारी शासनादेश के तहत उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 32022 शारिरिक शिक्षक(खेल अनुदेशकों) भर्ती प्रक्रिया को माननीय न्यायालय के डबल बेंच के आदेश के तहत तत्काल नियुक्ति प्रदान की जाए.

4- शिक्षामित्रों को अध्यादेश लाकर नियमित शिक्षकों की भांति समायोजित किया जाए.

5- आंगनबाड़ी कार्यकत्रीयों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देते हुए न्यूनतम वेतन लागू किया जाए.

6-कस्तूबरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कार्यरत समस्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को नियमित किया जाए. नियमितिकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक न्यूनतम वेतनमान का भुगतान किया जाए.

7-रोजगार सेवकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देते हुए न्यूनतम वेतनमान लागू किया जाए.

 

8-माध्यमिक शिक्षा में नियुक्त कम्प्यूटर अनुदेशकों को बहाल करते हुए एक नियमित मानदेय दिया जाए.

9-पशुपालन विभाग में कार्यरत पशुमित्र/पैरावेट योजना के अंतर्गत सभी कर्मचारियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाएऔर समान वेतन समान कार्य लागू किया जाए.

10- आउटसोर्सिंग से नियुक्त कर्मचारियों को ठेकाप्रथा खत्म कर नौकरी को सुरक्षित करत हुए समान वेतन समान कार्य लागू किया जाए.

कबतक का अल्टीमेटम?
इस महागठबंधन के लोगों ने मांगो के लिए सरकार को 17 फरवरी 2019 तक का समय दिया है. मांगे ना माने जाने पर 18 फरवरी 2019 को समस्त संविदाकर्मियों ने राजधानी लखनऊ में धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने की बात कही है. और उसकी जिम्मेदारी भी शासन-प्रशासन की बताई है.

कौन-कौन रहे शामिल
बेरोजगारों के महागठबंधन की इन मांगों के संबंध में तमाम संगठनों के पदाधिकारी शामिल रहे इनमें अनुदेशक संघ, प्रेरक संघ, शिक्षामित्र संघ, प्रशिक्षित बीपीएड संघ, आंगनबाड़ी संघ, रोजगार सेवक संघ, माध्यमिक कंप्यूटर संघ, आउटसोर्सिंग संघ, फशुमित्र संघ, कस्तूरबागांघी माध्यमिक विद्यालय संघ के तमाम लोग शामिल रहें.

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