सुप्रीम कोर्ट का बुलडोज़र पर रोक लगाने से इंकार, 3 दिन में हलफनामा देगी योगी सरकार

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दिल्ली: उत्तर प्रदेश की परिधी में पत्थरबाजों पर चल रहे बुलडोजर के पहिए रोकने की खातिर, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जमीयत उलेमा-ए-हिंद को झटका लगा है.जमीयत उलेमा ए-हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर की कार्रवाई पर रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, बुलडोजर की कार्रवाई पर पूरी तरह रोक नहीं लगा सकते।

जमीयत के वकील का दलील
दरअसल, दोनों पक्षों के वकील और दलील के दंगल में, जमीयत के वकील ने कहा कि, यूपी सरकार एक खास समुदाय को निशाना बनाकर बुलडोजर की कार्रवाई को अंजाम दे रही है और इस कार्रवाई से पहले कोई नियमों को ताक पर रखा जा रहा है. नोटिस भी नहीं दिया जा रहा है. आजादी से पहले और आपातकाल में भी ऐसा नहीं था. यूपी में जो हो रहा है वो असंवैधानिक है, 20-20 साल से घर बने हैं इसलिए कार्रवाई चौंकाने वाली है. कभी-कभी ये घर आरोपी के नहीं बुजुर्ग मां-बाप के होते हैं।

सरकार का सुप्रीम कोर्ट में पक्ष
वहीं सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि, चाहें कानपुर की बात हो या प्रयागराज की, अब तक जिन मामलों में भी कार्रवाई हुई है उन्हें पहले से नोटिस दिया गया था…कोर्ट को ये देखना चाहिए कि, आखिर याचिककर्ता कौन है. कुछ लोग सिर्फ अखबार की रिपोर्ट देखकर अर्जी लगा देते हैं ।

3 दिन में मांगा हलफनामा

दोनों पक्षों के वकील और उनकी दलील के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर पर की कार्रवाई पर पूरी तरह से रोक लगाने से तो इंकार कर दिया है. हालांकि, इन हालात में पूरे मामले पर 3 दिन में हलफनामा मांगा है. और अब इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होगी. ऐसे में सवाल ये है कि, क्या सरकार को ‘बुलडोज़र’ को मिली है ‘सुप्रीम’ राहत, औऱ पत्थरबाज़ों पर पड़ी है बड़ी ‘आफ़त’!

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