स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बेहाल, हड्डी विशेषज्ञ कर रहे हैं बुखार का इलाज

अपना बुलंदशहर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश प्रशासन लगातार कोरोना वायरस की तीसरी लहर की तैयारियों के दावे कर रहा है, लेकिन प्रदेश में मामूली बुखार ने ही स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है. हालातों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुलंदशहर के सरकारी अस्पतालों की हालात बेहाल है. शहर के जिला अस्पताल बाबू बनारसी दास में डॉक्टरों की भारी कमी है. सीएमओ का कहना है कि डॉक्टरों को तैनात करने की मांग शासन से की जा चुकी है. इसी के चलते बाबू बनारसी दास में बुखार जैसी बीमारी का इलाज हड्डी वाले डॉक्टर कर रहे हैं.

जिले के अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टरों के 258 पद हैं. सीएमओ का कहना है कि इनमें 141 ही डॉक्टर ही तैनात हैं. यहां तक की 10-12 डॉक्टर ट्रेनिंग के लिए जाते रहते हैं.

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117 पद डॉक्टरों के रिक्त हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बात करें तो वे लगातार अस्पतालों में मरीजों की संख्या दुगनी और तीगुनी भी हो चुकी है. मलेरिया डेंगू और टाइफाइड जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं. इसके बावजूद भी अस्पतालों में डॉक्टरों की तादाद में भारी कमी दिखाई दे रही है. उधर, बच्चों में लगातार बीमारी फैलती जा रही है, तो स्याना कस्बा क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक-एक बेड पर 3 बच्चे दिखाई दे रहे हैं मगर शासन प्रशासन अभी भी आंखें मूंदे बैठा है.

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