राम मंदिर में रखा जाएगा खास ‘टाइम कैप्सूल’, जानिए क्यों रखा जा रहा है

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अयोध्या: रामनगरी अयोध्या में मंदिर निर्माण का कार्य तेजी पर है. 5 अगस्त को होने वाले भूमि पूजन के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पीएम मोदी भी आ रहे हैं. भूमि पूजन के लिए  पवित्र नदियों का जल और अन्य तीर्थ स्थलों से पवित्र मिट्टी लाने का सिलसिला शुरू हो गया है. 5 अगस्त को पीएम मोदी राममंदिर की नींव में एक मन यानि 40 किलो चांदी की शिला स्थापित करेंगे.

रखा जाएगा टाइम कैप्सूल

मंदिर-मस्जिद विवाद से सबक लेते हुए राममंदिर के इतिहास को संजोये रखने का काम भी मजबूती से किया जा रहा है. अयोध्या में राममंदिर को लेकर भविष्य में कोई विवाद ना हो इसके लिए मंदिर के गर्भगृह में 200 फीट की गहराई में एक टाइम कैप्सूल रखा जाएगा संस्कृत में लिखित इन दस्तावेजों में मंदिर की पूरी डिटेल होगी. 18 जुलाई को हुई रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में इस बात पर फैसला लिया गया कि, इस ताम्रलेख में मंदिर का संक्षिप्त इतिहास, शिलान्यास की तारीख, भूमिपूजन करने वाले  मुख्य अतिथि, विशिष्ठ लोगों के नाम निर्माण की शैली, वास्तुविद का नाम रहेगा. साल 1989 में जब गर्भगृह के सामने मंदिर का शिलान्यास हुआ था उस वक्त भी एक ताम्रलेख जमीन में दबाया गया था.

 क्या है टाइम कैप्सूल?

दरअसल, टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की तरह होता है ये किसी तरह के मौसम से प्रभावित नहीं होता है. इसको भविष्य में इतिहास की जानकारी के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इससे इतिहासकारों और पुरातत्विदं को मदद मिलती है. 30 नवंबर 2017को स्पेन के बर्गोस में करीब 400 साल पुराना टाइम कैप्सूल निकला था. उसमें ईसा मसीह की मूर्ति और 1777 के समय की तमाम जानकारियां थीं.

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