देश में नई शिक्षा नीति को मंजूरी, HRD का नाम भी बदलकर हुआ शिक्षा मंत्रालय

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नई दिल्ली/लखनऊ:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी. इसके साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलते हुए शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है.केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस फैसले को बेहद अहम बताते हुए कहा कि 34 साल से शिक्षा नीति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था. उन्होंने उम्मीद जताई कि देशवासी इसका स्वागत करेंगे. केंद्रीय कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति पर मुहर लगा दी और इसके साथ ही 21वीं सदी के लिए भारत की शिक्षा व्यवस्था को नया रास्ता मिल गया।

कैसे तैयार हुई 

22 भाषाओं में ढाई लाख से ज्यादा लोगों के सुझाव, सवा दो लाख से ज्यादा पंचायतों के सुझाव, सभी राज्य सरकारों के शिक्षाविद और शिक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद 34 साल के अंतराल पर नई शिक्षा नीति तैयार हो गई है. इसके साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम भी बदलकर शिक्षा मंत्रालय रख दिया गया.दरअसल जब देश के सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ 4% शिक्षा पर खर्च और 1986 के बाद नई शिक्षा नीति नहीं बनी हो तो मौजूदा सरकार ने 2016 में ही नई शिक्षा नीति के लिए ड्राफ्ट के रूप में कदम बढ़ा दिए थे. इसके बाद दो समितियों का गठन किया गया, संसदीय समिति में भी मंथन हुआ और प्रकाश जावड़ेकर से लेकर रमेश पोखरियाल निशंक के आते-आते नई शिक्षा नीति बन ही गई. नई शिक्षा नीति में सबसे पहले स्कूल में हुए परिवर्तन के मुख्य बिंदु बताते हैं, क्योंकि भारत में स्कूली छात्रों की संख्या अमेरिका की कुल जनसंख्या से ज्यादा है. देश में 15 लाख से ज्यादा स्कूल है और करोड़ों अध्यापक, करोना महामारी के दौर में ऑनलाइन एजुकेशन पर बल दिया जा रहा है, लेकिन शहरों से लेकर गांव तक, सरकारी स्कूलों से लेकर प्राइवेट स्कूल तक अंतर बहुत है. इसी अंतर को पाटने की कोशिश नई शिक्षा नीति में नजर आती है।

प्राइमरी शिक्षा में बदलाव

0 से 3 साल की उम्र तक बच्चों के लालन-पालन और परिवारिक शिक्षा के लिए अभिभावकों को ट्रेनिंग दी जाएगी

3 से 6 साल के छात्रों के लिए खेल खेल में और प्रेक्टिकल लर्निंग पर जोर दिया जाएगा

प्राइमरी शिक्षा मातृभाषा ही में दी जाएगी

मिडिल क्लास से कोडिंग सिखाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी

रिपोर्ट कार्ड में शिक्षकों द्वारा दिए गए अंकों के साथ ही खुद छात्र और उसके सहपाठियों का भी मूल्यांकन होगा

कक्षा 6 से वोकेशनल कोर्स शुरू हो जाएंगे, इंटर्नशिप का भी प्रावधान रखा जाएगा

देश की 8 बड़ी भाषाओं में ऑनलाइन एजुकेशन दी जाएगी

डिजिटल लाइब्रेरी और विदेशों के साथ स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम की भी सुविधा होगी

नई तकनीक में शिक्षा के लिए 2023 तक अध्यापकों को ट्रेनिंग दी जाएगी

जीनियस और दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से शिक्षा में प्रावधान होगा

साल में दो बार होंगी बोर्ड एग्जाम होंगे

स्कूली शिक्षा व्यवस्था को 5 + 3 + 3 + 4 के आधार पर बनाया जाएगा

उच्च शिक्षा के लिए प्लान क्या है ?

उच्च शिक्षा के लिए 2030 का लक्ष्य रखा गया जिसमें कम से कम 50% कुल छात्र उच्च शिक्षा के लिए एंड रोल होने चाहिए इसमें भी अलग-अलग तरह की व्यवस्थाएं की गई है। नई शिक्षा नीति में कुल 27 मुख्य बिंदु है, जिसमें से 10 स्कूल एजुकेशन, 10 हायर एजुकेशन और 7 तकनीकी शिक्षा के लिए रखे गए है।

उच्च शिक्षा के लिए एक ही  रेगुलेटर होगा

एफिलेटेड संस्थानों को ग्रेडिंग दी जाएगी , ग्रेडिंग के आधार पर स्वायत्तता मिलेगी

सेंट्रलाइज एग्जाम कराने पर बल दिया जाएगा

उच्च शिक्षा में भी छात्रों को विषय चुनने की आजादी होगी

ग्रेजुएशन और मास्टर्स के नियम बदले जाएंगे

1 साल की हायर एजुकेशन पर सर्टिफिकेट, 2 साल की हायर एजुकेशन पर डिप्लोमा, 3 साल की हायर एजुकेशन डिग्री और 4 साल हायर एजुकेशन में रिसर्च प्रमाण पत्र दिए जाएंगे

हायर एजुकेशन में अंकों के आधार पर क्रेडिट पॉलिसी होगी

विदेशों के साथ स्टूडेंट एक्सचेंज और ई लर्निंग पर जोर रहेगा

जीडीपी का 6% सिर्फ शिक्षा क्षेत्र पर खर्च होगा

वर्चुअल प्रयोगशाला, डिजिटल लाइब्रेरी की  सुविधा होगी

सवाल अभी भी बाकी है…
नई शिक्षा नीति में नए बदलाव किए गए हैं ,लेकिन कुछ मौलिक सवाल अभी भी छूट गए हैं। जैसे क्या शिक्षा के अधिकार को 12वीं तक किया जाएगा ? क्या मिड डे मील का दायरा बढ़ाया जाएगा ? जिन छात्रों की पास ई लर्निंग की तकनीक नहीं है उनका क्या होगा ? क्या शिक्षा के क्षेत्र में भी एफडीआई की मंजूरी दी जाएगी ? कैसे सरकारी और प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में एकरूपता आएगी ? इसके जवाब मिलना अभी बाकी है।

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