लखीमपुर: ‘फर्जी पत्रकारों’ के गिरोह’ से प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक परेशान, M.D.M और रजिस्टर दिखाने का बनाते हैं दवाब, मांगते हैं पैसे!

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लखीमपुर: फर्जी पत्रकारों को लेकर प्रदेश सरकार बेहद सख्त है, खुद डीजीपी और कमिश्नर भी कई बार आदेश दे चुके हैं. लेकिन लखीमपुर जिले में इन ‘कथित पत्रकारों’ का ऐसा जाल फैला हुआ है कि, प्रशासन भी परेशान हो गया है. ये ‘कथित पत्रकार’ उगाही और वसूली के लिए ज्यादातर सरकारी स्कूलों को माध्यम बनाते हैं और शिक्षकों को मध्याहन भोजन की गुणवत्ता और हाजिरी रजिस्टर आदि चैक करने का दवाब बनाते हैं।

कथित पत्रकारों का ‘गिरोह’ और अजब-गजब नाम!
दरअसल, जिले में अजब-गजब नाम के यू-ट्यूब चैनल और अनाधिकृत पोर्टल/ वेबसाइट बनाकर तमाम लोग ऐसे हैं जो खुद को ‘पत्रकार’ बताते हैं और एक मोबाइल और एक माइक आईडी के साथ कहीं भी धौंस जमाने लग जाते हैं. अभी तक ना तो राज्य सरकार और ना ही केंद्र सरकार ने यू-टयूब चैनल वालों को मान्यता दी है लेकिन ये ‘कथित पत्रकार’ अपने आई कार्ड (पहचान-पत्रों) पर रजिस्टर्ड लिखकर खुलेआम घूमते हैं. इन ‘कथित पत्रकारों’ ने कई नेशनल चैनल और अखबारों के नाम को कॉपी करके उनके नाम में आगे या पीछे कुछ नाम जोड़ कर अपने यू-ट्यूब चैनल बना लिए हैं. इनके अजब-गजब नाम देखें तो किसी चैनल का नाम ‘सुलगती चट्टान’ है तो किसी का नाम ‘धधकती कलम’ कोई ‘R.हिंदुस्तान भारत’ है तो कोई ‘अखंड भारतवर्ष समाचारवाचक’ किसी का नाम ‘लखीमपुर की लहर’ है तो किसी का नाम ‘शोले समाचार’ है कई ‘अखंड केसरी’ है तो कोई ‘किंग ऑफ केसरी’ है. और ये सब वाट्सअप पर भी अजब-गजब नाम से ग्रुप बनाकर काम करते हैं।

प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक परेशान!
दरअसल, इन ‘फर्जी पत्रकारों’ का किसी संस्थान या खबरों से तो कोई दूर-दूर तक संबंध होता नहीं है. ऐसे में ये लोग लकड़ी के ठेकेदारों, बिल्डरों, शिक्षकों और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ को सॉफ्ट टारगेट बनाते हैं. जिले के प्राथमिक स्कूलों में जाकर ये MDM मध्याहन भोजन के बारे में शिक्षकों से पूछताछ करते हैं. खाने की गुणवत्ता और खाने में क्या बना है? क्या-क्या बनता है? रसोई दिखाओ? हाजिरी रजिस्टर दिखाओ? जैसे सवाल करके शिक्षकों को प्रताड़ित करते हैं. और तो और अपने साथ कुछ लोगों को भी लाते हैं जिनसे स्कूल के बाहर खड़ा करके स्कूल और शिक्षकों के खिलाफ बुलवाते हैं. नाम ना छापने की शर्त पर कई शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी और पुलिस से भी शिकायत की है. बीते दिनों पुलिस ने सक्रियता के साथ एक ‘कथित पत्रकार’ को थाने में बुलाकर समझाया भी था. इस बात से भी ये ‘गिरोह’ बौखला गया. जिसके बाद फिर कुछ दूसरे लोग स्कूल के बाहर पहुंचकर मजमा लगा दिए।

शिकात करने पर लगा देते हैं ‘जातिसूचक’ शब्द बोलने के आरोप
इस गिरोह की खास बात ये है कि, जब भी कोई शिक्षक या स्थानी निवासी इनकी शिकायत करता है तो ये लोग उसपर जातिसूचक शब्द बोलने का आरोप लगा देते हैं. बीते दिनों एक शिक्षक ने जब ऐसे ही कथित पत्रकार की शिकायत की थी तो उसने जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगा दिया।

सरकारी अस्पताल वाले भी परेशान

ऐसा नहीं है कि, इस कथित गिरोह के निशाने पर लकड़ी के ठेकेदारों, बिल्डरों, शिक्षक ही हों. सरकारी अस्पताल भी इनके उत्पीड़न से अछूते नहीं हैं. आए दिन किसी ना किसी सरकारी अस्पताल में निरीक्षण करने पहुंच जाते हैं ये ‘पत्रकार’. छोटी-छोटी बातों को तूल देकर बवाल कराने में तो मानों इनको महारथ हासिल हो।

सरकार की कर रहे बदनामी!

दरअसल, ये फर्जी पत्रकार खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाकर. MDM के खाने को बदनाम करते हैं. खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाकर सरकार के अच्छे काम को भी बदनाम करने का काम कर रहे हैं ।

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