खेल रत्न अवॉर्ड पर ‘मेजर’ गोल

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पिछले कुछ सालों से अगस्त का महीना ऐतिहासिक फैसलों का गवाह बनता जा रहा है. 2019 में मुस्लिम महिलाओं को ‘तीन तलाक’ की बेड़ियों से आजादी मिलना हो, जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को समाप्त करना हो, या फिर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की आधारशिला का रखना हो, अगस्त इन ऐतिहासिक फैसलों का साक्षी रहा है. इसी कड़ी में मोदी सरकार ने खेल से जुड़ा एक और बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया है. दरअसल मोदी सरकार ने राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदल दिया है. सरकार ने अब इस अवॉर्ड को हॉकी के ‘जादूगर’ कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखने का बड़ा फैसला लिया है. इस बात की जानकारी खुद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर दी.

पीएम मोदी ने ट्वीट कर क्या लिखा?

पीएम मोदी ने लिखा,  ”देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए. लोगों की भावनाओं को देखते हुए इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है. जय हिंद.”

मोदी ने लिखा- ध्यानचंद भारत के पहले खिलाड़ी थे, जो देश के लिए सम्मान और गर्व लाए. देश में खेल का सर्वोच्च पुरस्कार उनके नाम पर रखा जाना ही उचित है.

हॉकी का जादूगर… ध्यानचंद

अपनी शानदार उपलब्धियों से हिन्दुस्तान को गौरवान्वित करने वाले मेजर ध्यानचंद को हॉकी की दुनिया का जादूगर कहा जाता है. मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में हुआ था. ध्यानचंद ने महज 16 साल की छोटी उम्र में भारतीय सेना जॉइन कर ली थी. इसके साथ ही वो हॉकी की प्रैक्टिस भी करते थे. उनके अद्भुत खेल और प्रदर्शन की बदौलत भारत ने 1928, 1932 और 1936 के ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था. मेजर ध्यानचंद के अविश्वसनीय योगदान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, कि उन्होंने 1928 में एम्सटर्डम ओलिंपिक में सबसे ज्यादा 14 गोल किए. हॉकी के इस जादूगर ने अपने आखिरी ओलंपिक (बर्लिन 1936) में कुल 13 गोल दागे. मेजर की ये काबलियत अखबारों की सुर्खियां बन गईं. एक अखबार ने लिखा था ‘ये हॉकी नहीं, जादू था और ध्यानचंद हॉकी के जादूगर हैं’ तभी से उन्हें हॉकी का जादूगर कहा जाने लगा. भारत में ध्यानचंद के जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है.

खेल रत्न का इतिहास

भारत में खेत रत्न अवार्ड की शुरूआत 1991-92 में हुई थी. ये अवॉर्ड भारतीय खेलों का सर्वोच्च पुरस्कार माना जाता है. उस वक्त इसका नाम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया था. हॉकी में अब तक 3 खिलाड़ियों को खेल रत्न अवॉर्ड मिला है. इसमें धनराज पिल्ले (1999/2000), सरदार सिंह (2017) और रानी रामपाल (2020) शामिल हैं. इस अवार्ड की का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को सम्मानित कर उनकी मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ाना है.

 

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