क्यों मनाई जाती है बकरीद, जानिए, क्यों की जाती है कुर्बानी?

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ईद-उल-अजहा, बकरीद या फिर ईद उल जुहा का त्यौहार इस साल देशभर में 1 अगस्त को मनाई जाएगी. ईद-उल-अजहा इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 12 वें महीने की 10 तारीख को मनाई जाती है. पवित्र महीने रमजान के खत्म होने के बाद 70 दिनों के बाद मनाई जाती है. मीठी ईद के बाद ये इस्लाम का प्रमुख त्यौहार है. बकरा ईद पर कुर्बानी दी जाती है.

क्यों मनाते हैं बकरीद/ईद-उल-अजहा
इस्लाम में बकरीद के विशेष मायने है. इस्लामिक मान्यता के मुताबिक हजरत इब्राहिम ने अपने इकलौते बेटे हजरत इस्माइल को इसी दिन खुदा के आदेश पर खुदा की राह में कुर्बान किया था. तब खुदा ने उनके जज्बे, उनकी इबादत,उनकी अल्लाह के लिए वफादारी को देखकर उनके बेटे को जीवन दान दिया था. इस त्यौहार को हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में ही मनाया जाता है. इसके बाद ही अल्लाह के हुक्म के साथ इंसानों की जगह जानवरों की कुर्बानी देने का इस्लामिक कानून शुरू किया गया. ये त्यौहार त्याग और बलिदान की भावना जगाता है.

क्यों देते हैं कुर्बानी?
दरअसल, हजरत इब्राहिम ने जब  अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने लगे थे तो उन्हें लगा कि बेटे की कुर्बानी के वक्त उनकी (पिता होने के नाते) भावनाएं बीच में आ सकती हैं और इस वजह से उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध कर कुर्बानी दी थी. इसके बाद जब उन्होंने अपनी आंखों से पट्टी हटाई तो उनका बेटा उनके सामने जीवित खड़ा था. बेदी पर कटा हुआ दुम्बा (सउदी में पाया जाने वाला भेड़ जैसा जानवर) पड़ा था. इस वजह से बकरीद पर कुर्बानी देने की प्रथा की शुरुआत हुई.

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