अयोध्या विवाद : कुछ ही मिनटों तक चली सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अब होगा नई पीठ का गठन!

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नई दिल्ली : जैसे जैसे लोकसभा चुनाव पास आते जा रहे हैं राम मंदिर का मुद्दा गर्माता जा रहा है. साधु-संत राम मंदिर अब तक नहीं बनने की वजह से सरकार के प्रति अपना गुस्सा दिखा रहे हैं तो वहीं केंद्र की बीजेपी सरकार इस मुद्दे से बचकर निकलने की कोशिश में लगी है. दरअसल, इस राम मंदिर के मुद्दे पर सोमवार से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो गयी वाली है.

कुछ ही मिनटों तक हुई सुनवाई
देश के विवादित मुद्दे राम मंदिर निर्माण को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कुछ मिनटों तक चली इस सुनवाई के बाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसकी अगली तारीख जनवरी, 2019 तक कर दी. अयोध्या विवाद पर आज से शुरू हुई ये सुनवाई विवादित भूमि के बंटवारे को लेकर है.

पूरे देश की टिकी निगाहें
राम मंदिर-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर पूरे देश की नजर काफी समय से टिकी है. पिछले कई दशकों से अटका पड़ा ये मामला कई चुनावों में वोट और जीत के लिए अहम मुद्दा बनकर भी उभरा है. सोमवार को विवादित भूमि को 3 भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गयी याचिकाओं पर सुनवाई होनी है.

3 जजों की पीठ का किया गया था गठन
इस मामले की नये सिरे से जांच शुरू होनी है. जांच के लिए 3 जजों की नयी पीठ का गठन किया गया है जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं. चीफ जस्टिस के अलावा इस पीठ में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसफ शामिल हैं जो इस मामले में दायर अपीलों पर सुनवाई कर रहे हैं. इससे पहले 27 सितंबर 2018 को कोर्ट ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ वाले फैसले के खिलाफ याचिका पर पुनर्विचार से मना कर दिया गया. कहा गया कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होगा और पूर्व का फैसला इस मामले में प्रासंगिक नहीं होगा.

2010 में 2:1 बहुमत से आया था फैसला
आपको बता दें कि साल 2010 के 30 सितंबर को हाई कोर्ट की 3 सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्ष- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाए. लेकिन तीनों ही पक्ष को ये फैसला मंजूर नहीं था और फिर इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी. सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी. जिसके बाद से ही तीनों ही पक्ष की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से लगी है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर एक नजर
इलाहाबाद हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को आये हुए 8 साल हो गये. साल 2019 के आम चुनाव से पहले इस मामले पर काफी जोर दिया जा रहा है. सुनवाई तो आज से शुरू हो रही है लेकिन ये देखने वाली बात होगी कि इस मामले में कोर्ट का फैसला कब तक आता है.

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