लॉकडाउन के चलते बेसहारों के हक़ पर कुंडली मारे बैठें हैं सरकारी जनप्रतिनिधि

कानपुर:- कोरोना वायरस के चलते आज पूरे देश में लॉकडाउन घोषित है, जिसका असर अब साफ दिखने को मिल रहा है. इसका असर पूरे देश में सामान्य जनजीवन पर तो पड़ा ही रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा वो गरीब मजदूर इससे प्रभावित हो रहे है, जिनका जीवनयापन रोज की दिहाड़ी से होता है. ऐसे दिहाड़ी […]

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मज़दूरों का देश सिर्फ एक ही होता है, इसलिए वो देश लौट रहे हैं – फैज़ान हैदर

लखनऊ : लॉकडाउन में कारखाने बंद, आटा-दाल मिल नहीं रहा, रोटी के लाले शायद इसलिए घर जाना ही अब मजबूरी है. बस मिली नहीं, ट्रक चल नहीं रहे, जेब मे पैसा नही शायद इसलिए हजारों लोग पैदल ही निकल पड़े. सिर पर सामान और मन में किसी भी तरह घर पहुंचने का लक्ष्य. कोई अयोध्या […]

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उपचुनाव: बीजेपी आगे, सपा-बसा में दूसरे नंबर की लड़ाई, असमंज में कांग्रेस

अब उपचुनाव को लेकर सियासी दलों के दम-खम को देखें तो हाथी की चाल थोडी ज्यादा तेज दिख रही है. मुस्लिम और ब्राह्मण उम्मीदवारों की सोशल इंजीनियरिंग की इबारत पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने विरोधियों को अपने इरादे जता दिए हैं. मायावती ने सबसे पहले अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. राजनीतिक पंडित इसे मायावती का माइंड गेम बता रहे हैं

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SPECIAL REPORT: बीजेपी शासन में ही क्यों बढ़ी मॉब लिचिंग, कहां से आती है भीड़, क्या कहता है कानून

मॉब लिंचिग की घटनाएं सुनने के बाद हर किसी के मन में ये सवाल आता ही होगा कि अचानक इतने सारे लोगों को एक जगह पर होने वाली घटना का पता कैसे चल जाता है? कैसे ये भीड़ एकत्र होकर लोगों को मौत के घाट उतार देती है? एक रिसर्च के दौरान पता चला है कि ये एक समाजिक मनौविज्ञान घटना है, जिसके लिए पहले लोगों को किसी विषय पर जबरदस्ती भड़काया और उकसाया जाता है और फिर उसके इस गुस्से का इस्तेमाल करके ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जाता है. लोगों को धर्म के नाम पर, गौरक्षा के नाम पर, देशभक्ति के नाम पर भड़काया जाता है जिसके बाद ये लोग मॉब लिंचिंग भीड़ का हिस्सा बन जाते है.  आजकल सोशल मीडिया इसमें अहम रोल निभाती नजर आ रही है. कई बार सोशल मीडिया के जरिए ये भीड़ एकत्र हो जाती है.

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लोकसभा चुनाव 2019: भ्रम और भेड़चाल से ना निकले तो नहीं बदलेंगे मुस्लिमों के हालात!

2014 जेसे हालात 2019 में भी होंगे मेरा ये कहना केवल कयासभर नहीं है. बल्कि बीते चुनावों के विश्लेषण पर है. वरना क्या कभी ऐसा हो सकता है कि, जिस प्रदेश में करीब 3.48 करोड़ मुस्लिम मतदाता हों और देश की सबसे बड़ी पंचायत में उनका कोई नुमाइंदा ना हो.

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यूपी की राजनीति में नया बवाल…रातभर घनघनाए फोन!

यंका गांधी का एक दांव बुधवार के दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसा भूचाल लेकर आया जिसने मायावती से लेकर अखिलेश यादव तक को अचानक मिलने के लिए मजबूर कर दिया. इतना ही नहीं…

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवसः वो दिन सिर्फ हमें ही समर्पित है…

नई दिल्ली : अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष, 8 मार्च को मनाया जाता है. दुनिया के कई हिस्सो में महिलाओं के लिए सम्मान प्रशंसा और प्यार जाहिर करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है. लेकिन कुछ क्षेत्रों में यह दिवस […]

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टैक्स पर सरकार ने घुमाकर पकड़ा है कान, ऐसे समझिए टैक्स छूट की घोषणा

ऐसा कतई नहीं हुआ है. बल्कि गोयल बाबू की ये वो गुगली है जो आप अभी नहीं समझ पाए तो टैक्स भरते समय आपको बोल्ड कर देगी. चलिए हम इस गुगली को समझाते हैं.

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‘बीटिंग रिट्रीट’ से पूरा होता है गणतंत्र दिवस कार्यक्रम, ऐसे भारत को हासिल हुई ‘शाही बग्घी’

गणतंत्र दिवस और बीटिंग रिट्रीट का एक खास संबंध है. बीटिंग द रिट्रीट के बिना गणतंत्र दिवस अधूरा सा लगता है. हर साल 29 जनवरी के दिन राष्ट्रपति भवन में इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. इस दिन देश के राष्ट्रपति अपने खास बग्घी से निकलते हैं. जितना खास देश के लिए बीटिंग द रिट्रीट का कार्यक्रम होता है, उतना ही खास राष्ट्रपति की बग्घी भी है. आज आपको हम बतायेंगे कि आखिर खास क्यों है और इसकी अहमियत क्या है?

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कोस-कोस पर बदले पानी, ढाई कोस पर वाणी, ऐसी ही अनोखी कहानी है यूपी की

यहां पर भगवान राम की भूमि अयोध्या भी है और मुस्लिम प्रेम का प्रतीक मस्जिद भी है. सारी दुनिया में उत्‍तर प्रदेश ताज की धरती, कथक नृत्य का उत्पत्ति स्थान, बनारस की पावन हिन्दू धरती, भगवान कृष्ण का जन्म स्थान, वह जगह जहां बुद्ध ने अपना पहला धर्मोपदेश दिया था,आदि के कारण जाना जाता है.उत्‍तर प्रदेश की राजकीय भाषा हिन्‍दी है और यहां के लोग, हिन्‍दी के ही अलग-अलग रूपों को बोलते हैं. यहां आपसी बातचीत में गालियों का भरपूर इस्‍तेमाल किया जाता है, लेकिन कोई बुरा नहीं मानता है.

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