मिर्जापुर वाले मुन्ना भैया अब बिच्छू के अवतार में आए हैं, देखेंगे नहीं

मनोरंजन/वायरल होमपेज स्लाइडर

मुंबई: मिर्जापुर सीरिज से युवा दिलों पर छाने वाले मुन्ना भैया उर्फ दिव्येंदु लोकप्रिय क्राइम-थ्रिलर ‘बिच्छू का खेल’ 18 नवंबर से लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफार्म पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है और तभी से वेब शो को दर्शकों, फर्टेर्निटी और समीक्षकों से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिल रही है. दिलचस्प बात यह है कि डिजिटल शो, जो हिंदी लेखक अमित खान की बेस्टसेलर ‘बिच्छू का खेल’ का एक रूपांतरण है, वह भी खूब वाहवाही बटोर रहे हैं. शो की विनम्र सफलता और इसकी लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए, लेखक के प्रशंसकों और फॉलोवर्स की बढ़ती मांग के कारण इसे एक बार फिर रीप्रिंट किया जा रहा है.

शो के बाद से नॉवेल में आया उछाल

अमित खान ने साझा किया,“यह देख कर वास्तव में बहुत अच्छा लग रहा है. मेकर्स ने जिस तरह से उपन्यास को वेब शो में रूपांतरित किया है वह वास्तव में सराहनीय है और इसमें एक सकारात्मक वाइब है. शो की सफलता के बाद से, नॉवेल ‘बिच्छू का खेल’ की बिक्री में जबरदस्त रूप से इज़ाफ़ा हुआ है क्योंकि रीडर्स से यह मांग एक बार फिर बढ़ गयी है. यह किताब 30 साल पहले लिखी गई थी और उस वक़्त भी इसे रीप्रिंट किया गया था. अमित आगे कहते है,“यह भाग्य था कि बिच्छू का खेल बनाया गया. शो की सफलता के बाद, लगभग मेरे सभी रीडर्स ‘बिच्छू का खेल’ उपन्यास की मांग कर रहे हैं. शो के प्रचार अभियान के दौरान मुझे और मेरे उपन्यास को उचित श्रेय देने के लिए एकता जी को बहुत-बहुत धन्यवाद.”

दर्शकों में मची खलबली

‘बिच्छू का खेल’ ने निश्चित रूप से दर्शकों के बीच खलबली मचा दी है और फिल्म, टेलीविजन व ओटीटी दुनिया के अभिनेताओं के साथ इसे एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है. स्टार कास्ट में दिव्येंदु, अंशुल चौहान और जीशान कुआदरी के साथ सत्यजीत शर्मा, राजेश शर्मा, अभिषेक चौहान, गगन आनंद, आकांक्षा ठाकुर और अभिनव आनंद शामिल हैं. पहले से ही सफलतापूर्वक 18 नवंबर से ऑल्ट बालाजी और ज़ी5 पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध, ‘बिच्छू का खेल’ एक अपराध थ्रिलर है जो कि एक नवोदित लेखक अखिल की कहानी के इर्द-गिर्द घूमती है,  जिसका जीवन किसी रोलर कोस्टर की सवारी से कम नहीं है और यह अब आपको ट्विस्ट के साथ अपनी सीट के किनारे बांध कर रखता है.

 

 

5 thoughts on “मिर्जापुर वाले मुन्ना भैया अब बिच्छू के अवतार में आए हैं, देखेंगे नहीं

  1. The very core of your writing while sounding reasonable in the beginning, did not really work very well with me personally after some time. Somewhere throughout the sentences you managed to make me a believer unfortunately only for a while. I still have a problem with your leaps in logic and you would do well to fill in those gaps. If you can accomplish that, I would definitely be amazed.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *