एक चिट्ठी मायावती जी के नाम….’दांव’ किसी पर ‘दोष’ मुस्लिमों पर?

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आदरणीय!

              सुश्री मायावती जी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन समाज पार्टी)

इस बात से तो आप भली-भांति परिचित ही हैं कि, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 के परिणामस्वरुप आपकी पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. बाबा साहेब के विचारों वाले ‘वृक्ष’ और मान्यवर कांशीराम जी के ‘संघर्षशील मिशन’ का ऐसा परिणाम होगा (यूपी चुनाव में BSP की मात्र 1 सीट) ये शायद किसी भी ‘बहुजन’ ने सपने में भी नहीं सोचा होगा. दासताओं के दंश और अन्याय की अंधी गलियों से गुजरकर इस देश-प्रदेश के दलित-शोषित समाज ने अपनी निष्ठा और प्रतिष्ठा कांसीराम जी के बाद आपको (बहुजन समाज पार्टी की मुखिया) समर्पित की. हर चुनाव में ये वर्ग आपके साथ खड़ा रहा इसलिए इस 18% वोटबैंक पर कोई शक नहीं कर सकता था ये आपकी ताकत रहे. फिर आपके सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले से आप सत्ता में भी रहीं. लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद आपके बयान को सुना तो सन्न रह गया. इस बार आपकी स्क्रिप्ट अच्छी नहीं लिखी गई. इसलिए आपको ये पत्र लिख रहा हूं. आपके बयान के मुताबिक ‘मुस्लिम समाज ने आपकी पार्टी को वोट नहीं दिया इसलिए आपकी पार्टी जीत नहीं सकी’ ।

आपने उत्तर प्रदेश और तो और उत्तराखंड में भी अपनी हार का ठीकरा मुस्लिम समाज के माथे पर मढ़ दिया, लेकिन अब में आपसे कुछ चंद सवाल करना चाहता हूं. अपनी और अपने परिवार की महत्वकांक्षाओं के आगे आपने बीते समय से…

1- क्या कभी मुस्लिम समाज (जिस पर आपने ठीकरा फोड़ा है) के दुख-दर्द का हिस्सा बनने की कोशिश की?
2- क्या उनके किसी संघर्ष (सिस्टम, समाज के उत्पीड़न) में आप उनके साथ कहीं खड़ी हुई?
3- CAA-NRC जैसे मुद्दे पर तो आपने अपने कार्यकर्ताओं-नेताओं को सड़क पर ना उतरने जैसे सख्त संदेश भी दिए?
4- मॉब लिंचिग या मुसलमानों से जुड़े किसी मुद्दे पर आपने उनकी मनोदशा में कोई मरहम लगाने जैसा काम किया?
5- सदन में कोई मुद्दा आपने उठाया हो, बल्कि कई मुद्दों पर बायकॉट करके सरकार की राह आसान ही की ।
हां…मुस्लिमों के लिए आपने जो काम किया अब उसका हिसाब-किताब भी में आपको दे देता हूं,
1-आपने कद्दावर मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी उनके पुत्र अफजल सिद्दीकी रूलाकर पार्टी से निकाला ।
2- अमरोहा से सांसद दानिश अली लोकसभा में संसदीय दल के नेता पद से हटाए।
3- मुनकाद अली प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाए ।
4- कानपुर मंडल सेक्टर प्रभारी नौशाद हटाए ।

5-  इनके अलावा कद्दावर नेता कादिर राणा, नूर सलीम राणा, जमील अहमद कासमी, नवाजिश आलम, पूर्व सांसद अमीर आलम, सहारनपुर वाले माजिद अली, बिजनौर के पूर्व विधायक शेख सुलेमान, दो बारके विधायक शेख मोहम्मद गाजी, शाहनवाज राणा, असलम चौधरी किन हालात में बसपा ‘हाथी’ से उतरे आप अच्छे से जानती हैं.

खैर, अब लौटकर यूपी विधानसभा चुनाव पर ही आते हैं, वैसे तो आपको इस चुनाव में सत्ताधारी BJP से लड़ना चाहिए था. लेकिन गजब बात ये कि, आप मुस्लिम उम्मीदवारों को मुस्लिम उम्मीदवारों से लड़ाती दिखीं. इस चुनाव के ही एक आंकड़े के हिसाब से आपने करीब 90 से अधिक सीटों पर दूसरे दल के मुस्लिम उम्मीदवार के सामने भी ‘मुस्लिम उम्मीदवार’ उतारे, यानि (वजह जो भी रही हो) आप खुद नहीं चाहती थीं कि, आपके उम्मीदवार जीतें…तो फिर चुनाव परिणाम के बाद मुसलमानों के माथे अपनी हार का ठीकरा क्यों फोड़ रही है…वैसे भी इस बार आपने ‘दांव’ किसी पर लगाया था औ ‘दोष’ किसी को दे रही हैं. एक बात और अंत में आपसे निवेदन के साथ लिख रहा हूं कि, कृप्या करके मुस्लिमों को किसी का डर मत दिखाइये बल्किइस बात पर चिंतन करिए कि, सालों से आपको समर्पित दलित समुदाय आपसे दूर क्यों हो रहा है….और हां आखिरी निवेदन ये कि, मुस्लिम वोट किसी की ‘जागीर’ नहीं है…बल्कि मैं तो मुस्लिम समाज से भी अपील करता हूं कि, अगले बार ऐलान के साथ वादे और दावे के साथ अपना वोट कथित सेक्युलर पार्टियों के बजाए BJP को दें कम से कम हमारे दिल और उनके दल की दूरी तो कम होगी, हर चुनाव में मुस्लिम वोट के नाम पर लगने वाली पैंठ-बाजार भी बंद हो जाएंगी. नहीं तो फुटबाल ही बने रहेंगे सत्ता की मलाई आप लोग खाएं और दोष और दंड मुसलमान झेलें ।

प्रेषक-

आपके बयान से आहत एक भारतीय मुस्लिम- साजिद अली

जय भीम-जय भारत ।।

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